Tuesday, May 22, 2012

ग़ज़ल १७

ग़ज़ल १७

सोना सच्चा न हुआ गल जायेगा
आग में मत हाथ रख जल जायेगा

अफवाहों का दौर आया है शहर में
खोटा सिक्का भी यहाँ चल जायेगा

तेजी से गुजरने की बात मत करना
वक्त न पकड़ा तो निकल जायेगा

मोम का पुतला बना हर शख्स है
धूप में मजबूत तन पिघल जायेगा

इन्शानियाँ की लाश वो ढोते यहाँ
कैसे सूर्य भ्रस्टाचार का ढल जायेगा

अयान गली से शोर है उस संसद तक
देखना है वहाँ पर कौन सा दल जायेगा

3 comments:

  1. आपके ब्लॉग पर लगा हमारीवाणी क्लिक कोड ठीक नहीं है और इसके कारण हमारीवाणी लोगो पर क्लिक करने से आपकी पोस्ट हमारीवाणी पर प्रकाशित नहीं हो पाएगी. कृपया लोगिन करके सही कोड प्राप्त करें और इस कोड की जगह लगा लें. क्लिक कोड पर अधिक जानकारी के लिए निम्नलिखित लिंक पर क्लिक करें.
    http://www.hamarivani.com/news_details.php?news=41

    टीम हमारीवाणी

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  3. इन्शानियाँ की लाश वो ढोते यहाँ
    कैसे सूर्य भ्रस्टाचार का ढल जायेगा !!
    इंसानियत??... भ्रष्टाचार
    मोम के पुतले ही हो गये हैं मानव !
    खरी खरी कह दी ग़ज़ल ने !

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