Monday, May 28, 2012

ग़ज़ल -18

ग़ज़ल -18

वक्त दर वक्त वो याद आने लगे
दिल की गहराइयों में सामने लगे

यक़ीनन ये दूरियां घटी और बढ़ी
हम यकीनों से सजदा कराने लगे

वो हमारे जेहन से गुजरे ही थे
शहर में वो बदनामी उठाने लगे

गुल भी अनजान है ख़ामोशी से
हम आहिस्ते खुशबू चुराने लगे

दोस्त बनके वो कुछ पल ही रहे
औ हम उनको बागबाँ बनाने लगे

वफ़ा का अयान ऐसा आलम हुआ
दोस्ती का कर्ज हम चुकाने लगे

Tuesday, May 22, 2012

ग़ज़ल १७

ग़ज़ल १७

सोना सच्चा न हुआ गल जायेगा
आग में मत हाथ रख जल जायेगा

अफवाहों का दौर आया है शहर में
खोटा सिक्का भी यहाँ चल जायेगा

तेजी से गुजरने की बात मत करना
वक्त न पकड़ा तो निकल जायेगा

मोम का पुतला बना हर शख्स है
धूप में मजबूत तन पिघल जायेगा

इन्शानियाँ की लाश वो ढोते यहाँ
कैसे सूर्य भ्रस्टाचार का ढल जायेगा

अयान गली से शोर है उस संसद तक
देखना है वहाँ पर कौन सा दल जायेगा

ग़ज़ल :१६

ग़ज़ल :१६

पीने का पानी जहाँ ठहरा हुआ है
उतना ही कड़ा वहाँ पहरा हुआ है

खुले आकाश को देखे सालों हो गए
आज चारो तरफ ही कोहरा हुआ है

चिरागों की चेतना ये समा पी गयी
और अँधेरा आज फिर गहरा हुआ है

अनजाने हम इस गुलामी में फस गए
पर ये तिरंगा शान से फहरा हुआ है

ये प्रजा अपनी शिकायतें करे किस्से
राजा इनका पूर्णतयः बहरा हुआ है

बेबस लोगों ने अयान खुद कब्र खोदी
अब कफ़न ही उनके सर सेहरा हुआ है

ग़ज़ल :१५

ग़ज़ल :१५

सालों से बंधी जख्म की पट्टी को खोलिए
आपने देखा है जो सच उसको आज बोलिए

सूर्य से चुराकर मै यहाँ लाया हूँ एक किरण
इन नज़रो के पैमाने में उजालों को तौलिये

खुद बखुद ये बिजलियाँ चमक कर गिरेंगी
आप अपने विचारो को चेतना से घोलिये

समुन्दर भी चला आएगा प्यासे लबों तक
पहले के जमाने में माना आप खूब रो लिए

हमसे तो कहीं बेजुबां परिन्दें ही नेक है
वो चर्च मंदिर और मस्जिद भी हो लिए

अयान यह तन डुबाकर बड़ी भूल हो गयी
पापियों ने सारे पाप मेरी गंगा में धो लिए

ग़ज़ल :१४

ग़ज़ल :१४

साहिल में सूना सा एक घर बना है.
आकाश में फैला अँधेरा भी घना है

दिन में इन आँखों को सुकून दे देना
यहाँ पूरी रात ही तुमको जागना है

बस्तियों में नकाबपोश है आये
सेवा करके मांग लो जो माँगना है

इस आँगन में तुम ना करो हलचले
यहाँ पे पुराना सा खोखला तना है

मर्यादाओं की सीमा नशेडी हो गयी
सौख से लान्घिये जिनको लांघना है

जख्मो में अयान संक्रमण है फैलता
अच्छा होने के लिए सीना मना है

Sunday, May 20, 2012

ग़ज़ल :१३

 ग़ज़ल :१३

प्यार करना और निभाना है बहुत कठिन यारो
इस ज़िन्दगी में मुस्कुराना है बहुत कठिन यारो

दिल के संग खिलवाड़ करना चलता है रात दिन
इस रूठते दिल को मनाना है बहुत कठिन यारो

वक्त के संग इसप्यार के मायने है बदलने लगे
हर वक्त इसे समझ पाना है बहुत कठिन यारो

ऐतबार करना अब हमें दोबारा कैसे आएगा
यादों से उसको भुलाना है बहुत कठिन यारो.

शोहरत मिलती रही है सिसकियों के साथ में
चुपके से रोना और रुलाना है बहुत कठिन यारो

लाख लिखना पड़े यारो दुनियादारी के सबक
पहले प्यार को मिटाना है बहुत कठिन यारो

अयान दिल की दास्तानें चल रही है रात दिन
ख्वाबों को सम्हाल पाना है बहुत कठिन यारो





ग़ज़ल :१२

ग़ज़ल :१२
 
कुछ राज छिपाए है सम्हलता हुआ चेहरा.
अच्छा नहीं लगता है बदलता हुआ चेहरा,

चेहरों में है नकाब यहाँ इस कदर लगे हुए
तूफ़ान को समेटे है ये बहलता हुआ चेहरा,

सच्चाई देखी हमने जब भी सूरमाओं की
मोम सा  दिखता है पिघलता हुआ चेहरा 

मासूम निगाहें है और चुपचाप है ये लब
हर रात में जलता है दहलता हुआ चेहरा

बर्फ की तासीर को हम समेटे हुए यहाँ
बेमौत मर रहा है फिसलता हुआ चेहरा

हर बच्चा सहम जाता है जब देखता उसे
अँधेरे से खौफनाक निकलता हुआ चेहरा

बड़ा हो गया है तो बड़प्पन को साथ रख
भाता नहीं अयान ये मचलता हुआ चेहरा